मेवाड राजवंश
भारत के इतिहास में सबसे प्राचीन और गोरवशाली वंश परंपरा इस वंश की ही रही हैं! राजस्थान में इनका आगमन वालाभि जो की गुजरात में है! से माना जाता है आज से हम शुरु कर रहे हैं राजस्थान में इस राजवंश की नींव रखने वाले बप्पा रावल या कालभोज से बप्पा रावल का जन्म इडर नामक स्थान पर 731AD में माना जाता हैं इनके पिता का नाम महेंद्र था जो इडर के तत्कालीन शासक थे! बप्पा रावल उनका विरुद् था जो उन्हे स्थानिय प्रजा से प्राप्त हुआ था! उनका नाम कालभोज था जिसमे कई मतभेद है कभी इतिहासकार उन को महेंद्र कहते है परंतु यह सत्य नही जान पड़ता मेवाड पर उस समय राजा मान मोरी का शासन था जो की मोरी वंश का प्रतापी राजा था बप्पा रावल ने हरित मुनि के आशीर्वाद और भिल लोगो के साथ से उसे हराकर अपना राज्य कायम किया! चित्तौड़ को जितना कोई आसान काम नही था पर उन्हें प्रसिधी मिली अरबो को खदेड़ कर, 712 ई, में मोहम्मद बिन कासिम से सिंध को जीता था ! उसके बाद अरबो ने चारो ओर से धावे करना शुरु कर दिये तब इन्होंने चावडो, मोर्यो सेंधवो, कचेलो को हराया! मारवाड, मालवा, mewad, गुजरात आदी सभी स्थानों पर इनकी सेनाएँ छा...